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बेहतरीन अभिनय के लिए जाने जाते थे शम्मी

बेहतरीन अभिनय के लिए जाने जाते थे शम्मी

बेहतरीन अभिनय के लिए जाने जाते थे शम्मी
गुजरे जमाने के दिग्गज अभिनेता शम्मी कपूर ने सिनेमा की दुनिया में एक जूनियर आर्टिस्ट के रूप में कदम रखा, उन्हें महीने के 50 रुपये सैलरी मिलती थी और अगले चार साल तक शम्मी कपूर अपने पिता के पृथ्वी थिएटर के पास ही रहते करते थे और साल 1952 में अपनी आखिरी सैलरी 300 रुपये ली थी। 1953 से 1955 के बीच शम्मी कपूर जब श्रीलंका में छुट्टी मनाने गए हुए थे तो उनकी मुलाकात विदेशी बैली डांसर और इजिप्टियन एक्ट्रेस 'नादिया गमाल' से हुई और दोनों रिलेशनशिप में आ गए लेकिन कुछ समय बाद नादिया के वापस जाने पर वह रिश्ता टूट गया।
शम्मी कपूर को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का 'एल्विस प्रेस्ली' कहा जाता था। उन्हें 'तुमसा नहीं देखा', 'दिल देकर देखो', 'सिंगापुर', 'जंगली', 'कॉलेज गर्ल', 'प्रोफेसर', 'चाइना टाउन', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'कश्मीर की कली', 'जानवर', 'तीसरी मंजिल', 'अंदाज' और 'सच्चाई' जैसी कई फिल्मों में बेहतरीन अभिनय के लिए जाना जाता है।
पत्नी गीता की मौत के बाद शम्मी कपूर काफी टूट गए थे और उन्होंने खाना पीना छोड़ दिया था। 
पहली पत्नी गीता से शम्मी की मुलाकात साल 1955 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। इस फिल्म में शम्मी कपूर लीड रोल में थे लेकिन गीता का इस फिल्म में कैमियो था। इसी दौरान दोनों का प्यार परवान चढ़ा और इसके 4 महीने बाद दोनों ने शादी कर ली। शम्मी कपूर का असली नाम शमशेर राज कपूर था। बाद में वो शम्मी कपूर के नाम से बॉलीवुड में मशहूर हुए। 

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