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फेफड़े ही खराब नहीं करती, दिमागी संतुलन भी बिगाड़ती है सिगरेट

फेफड़े ही खराब नहीं करती, दिमागी संतुलन भी बिगाड़ती है सिगरेट

फेफड़े ही खराब नहीं करती, दिमागी संतुलन भी बिगाड़ती है सिगरेट
धूम्रपान करने वाले से जब भी कहा जाता है तो उसे यही नसीहत दी जाती है कि इससे उसके फेफड़े खराब हो जाएंगे। सांस लेने में परेशानी होगी और उसे कैंसर भी हो सकता है। हाल के कई अध्ययनों से सामने आया है कि सिगरेट इससे कही ज्यादा खतरनाक होती है। वह शरीर ही नहीं उसके दिमाग पर भी असर डालती है। हाल ही हुई एक स्टडी में भी यह सामने आया है कि जो लोग स्मोकिंग करते हैं उन्हे क्लिनिकल डिप्रेशन होने का खतरा उन लोगों से कहीं ज्यादा होता है, जो स्मोकिंग नहीं करते। जांच में सामने आया है कि स्मोकिंग करनेवाले 14 प्रतिशत कॉलेज गोइंग यंगस्टर्स डिप्रेशन की किसी न किसी स्टेज से गुजर रहे हैं, जबकि स्मोकिंग न करनेवाले छात्रों में डिप्रेशन का कोई लक्षण देखने को नहीं मिला है। स्मोकिंग करने वाले छात्रों में डिप्रेशन के लक्षण तो अधिक सामने आए ही, साथ ही स्मोकिंग करनेवाले यंगस्टर्स उन बच्चों की तुलना में शारीरिक और मानसिक रूप से भी कमजोर साबित हुए जो स्मोकिंग नहीं करते हैं। 
वैज्ञानिकों का कहना है कि अध्ययन में यह बात भी साबित हुई की कम उम्र में अगर स्मोकिंग की शुरुआत कर ली जाती है तो डिप्रेशन के चांस और अधिक बढ़ जाते हैं। ग्रोइंग बॉडी और डिप्रेशन के बीच काफी मजबूत लिंक शोध में सामने आया। इज़राइल के यरुशलम शहर स्थित हिब्रू यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने सर्बियाई यूनिवर्सिटीज में प्रवेश लेनेवाले 2,000 से अधिक छात्रों के सोशल- इकनॉमिक और पॉलिटिकल सर्वेक्षण के बाद यह रिजल्ट निकाला है। यह स्टडी जर्नल प्लास वन में प्रकाशित हुई है। शोधार्थियों का कहना है कि तंबाकू को अभी सीधे तौर पर डिप्रेशन से हम कनेक्ट नहीं कर सकते, इस पर शोध जारी है। क्योंकि तंबाकू हमारे ब्रेन पर कई तरह से रिऐक्ट करता है। लेकिन सिगरेट ड्रिप्रेशन का मरीज बनाने में बड़ा रोल निभाती है।

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