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धूम्रपान छोड़ने के बावजूद बना रहता है कैंसर का खतरा -15 साल बाद भी हो गया फेफड़े और सांस की नली में कैंसर

धूम्रपान छोड़ने के बावजूद बना रहता है कैंसर का खतरा -15 साल बाद भी हो गया फेफड़े और सांस की नली में कैंसर

 डॉक्टरों की माने तो स्मोकिंग छोड़ देने भर से कैंसर का खतरा खत्म नहीं होता। जिन लोगों ने सालों स्मोकिंग की है, उन्हें कई सालों बाद भी कैंसर हो सकता है। इसलिए 50 साल की उम्र के बाद हर साल अपनी चेस्ट का सीटी स्कैन जांच जरूर कराएं ताकि बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल सके और इलाज संभव हो। बीएलके सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के कैंसर एक्सपर्ट डॉक्टर सुरेंद्र कुमार डबास ने बताया,  हरियाणा के 60 साल के राम मेहर कई सालों से स्मोकिंग कर रहे थे, लेकिन 15 साल पहले उन्होंने स्मोकिंग छोड़ दी। राम मेहर को 2004 में गले का कैंसर हुआ था। इलाज के बाद वो ठीक हो गए थे और उन्होंने स्मोकिंग छोड़ दी थी। लेकिन अब 2019 में उन्हें फिर से कैंसर हुआ है। उन्हें लंग्स और सांस की नली में प्राइमरी स्टेज पर कैंसर का पता चला है। कीमोथेरपी और रेडिएशन की मदद से इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर डबास ने कहा कि दोनों कैंसर अब तेजी से ठीक हो रहे हैं। अच्छी बात ये है कि वो शुरुआती लक्षण के साथ ही इलाज के लिए पहुंच गए, इसलिए इलाज का सही असर हो रहा है। आमतौर पर लंग्स कैंसर का पता काफी देर से चलता है। लगभग 80 पर्सेंट बीमारी अडवांस स्टेज में ही पता चलती है, केवल 20 पर्सेंट ही शुरुआती स्टेज में इलाज के लिए पहुंच पाते हैं। डॉक्टर ने कहा कि शुरू में इसके कोई लक्षण नहीं होते हैं, इसलिए 50 साल से ऊपर के लोगों को हर साल चेस्ट सीटी स्कैन करवाना चाहिए। डॉक्टरों की मानें तो सिगरेट, गुटखा और तंबाकू के कारण गला, सांस की नली और फेफड़े का कैंसर होता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनमें गले और फेफड़ों के कैंसर का खतरा सबसे अधिक होता है। डॉ. डबास ने लोगों से स्मोकिंग छोड़ने की अपील की है और कहा है कि भले ही किसी ने स्मोकिंग बंद कर दी हो, लेकिन 10-20 साल बाद भी कैंसर का खतरा बना रहता है। लंग्स कैंसर के मामले खतरनाक रूप से बढ़ रहे हैं और इसके कारणों में तंबाकू का व्यापक इस्तेमाल है। 

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