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इमाम बुखारी बोले, पुनर्विचार याचिका की जरूरत नहीं

इमाम बुखारी बोले, पुनर्विचार याचिका की जरूरत नहीं

इमाम बुखारी बोले, पुनर्विचार याचिका की जरूरत नहीं 
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ के फैसले से दशकों पुराने बेहद संवेदनशील मामले की कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सर्वसम्मति से लिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या की 2.77 एकड़ विवादित भूमि को हिंदुओं को दे दी, जिससे राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन प्रमुख स्थान (वैकल्पिक स्थल) पर देने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि अयोध्या मामले को अब आगे नहीं बढ़ाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि अब देश में साम्प्रदायिक तनाव के लिए जगह नहीं होगी और आगे से ऐसे मुद्दों को हवा नहीं दी जाएगी। बुखारी ने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि देश कानून और संविधान के अमल पर चलता है। 134 साल से चल रहे विवाद का अंत हुआ। पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने निर्णय लिया। गंगा-जमुनी संस्कृति और सद्भाव को देखते हुए कि यह प्रयास करना होगा कि आगे देश को इस तरह के विवाद से नहीं गुजरना पड़े। उन्होंने कहा कि देश संविधान के तहत चले, कानून का अमल होता रहे, साम्प्रदायिक तनाव नहीं हो और समाज नहीं बंटे, इसके लिए सभी को अपनी भूमिका अदा करनी होगी। हिंदू-मुस्लिम की बात बंद होनी चाहिए और देश को आगे बढ़ाने के लिए सब मिलकर चलें। शाही इमाम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान से यह उम्मीद की जानी चाहिए कि देश सद्भाव की तरफ आगे बढ़ेगा। फैसले के खिलाफ अपील से जुड़े ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयान के बारे में पूछे जाने पर बुखारी ने कहा कि मेरी अपनी राय है कि मामले को ज्यादा बढ़ाना उचित नहीं है। पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट में जाना बेहतर नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय पहले से कहता रहा है कि वह फैसले का सम्मान करेगा और अब फैसला आने के बाद लोग इससे सहमत हैं। 
 

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